इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने इरानियन इंस्टीट्यूट आफ़ कांग्नीटिव साइंस स्टडीज़ के अधिकारियों और कर्मचारियों से मुलाक़ात में कहा कि पिछले बीस साल में ईरान की वैज्ञानिक प्रगति अच्छी रही है लेकिन इसकी रफ़तार में और भी तेज़ी आनी चाहिए।
वरिष्ठ नेता ने कहा कि वैज्ञानिक विकास की वर्तमान गति में कोई कमी नहीं आनी चाहिए बल्कि इसमें इतनी तेज़ी आनी चाहिए कि हम आने वाली बीस तीस साल में वैज्ञानिक विकास की चोटी पर पहुंच जाएं।
आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने कहा कि ईरान को अपनी वर्तमान वैज्ञानिक प्रगति पर संतुष्ट होकर बैठ नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुझे अच्छी तरह पता है कि देश राजनैतिक और आर्थिक कठिनाइयों के हालात में भी बड़े लक्ष्य पूरे करने में सक्षम है।
वरिष्ठ नेता ने दो महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि पहला सुझाव यह है कि ईरानी वैज्ञानिक पश्चिम की सारी वैज्ञानिक उपलब्धियों का भरपूर प्रयोग करें। शिक्षार्थी बनने से कभी भी हिचकिचाना नहीं चाहिए मगर हमें इस बात पर ज़रूर लज्जा आनी चाहिए कि हम हमेशा हमेशा शिक्षार्थी ही बने रहें। उनका कहना था कि शिक्षार्थी बनने के बाद एक बिंदु पर पहुंच का इंसान ख़ुद शिक्षक ज़रूर बने और दूसरों को शिक्षा दे।
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने दूसरा सुझाव यह दिया कि पश्चिम के सुझावों और योजनाओं पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उनका कहना था कि पश्चिमी देश जो आज आधुनिक विज्ञान के क्षेत्र में विकसित हैं, वही पूरे इतिहास में राष्ट्रों के ख़िलाफ़ भयानक अपराध भी करते रहे हैं।